Wednesday, 22 February 2017

Nanad Bhabi Ki Ek Sath Chudai

मेरी उम्र छब्बीस साल है और मैं सरकारी दफ़्तर में ऑडिटिंग ऑफिसर हूँ और हमारे दफ़्तर की शाखायें पूरे देश में हैं और अक्सर मुझे काम के सिलसिले में दूसरे शहरों की शाखाओं में कुछ महीनों के लिये जाना पड़ता है। मैं शादीशुदा नहीं हूँ इसलिये मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं होती है। अपनी पिछली कहानी (एक प्रमोशन की खातिर) में जैसे कि मैंने आपको बताया था कि कैसे लखनऊ पोस्टिंग के दौरान मैंने अपनी सहकर्मी लतिका को चोदा। उसी adult story का सीक्वल पेश कर रहा हूँ।



इस बार दफ़्तर के काम से मेरी पोस्टिंग चंडीगढ़ हुई थी। वहाँ मैंने अपने सह-कर्मचारी की मदद से एक जगह पेइंग-गेस्ट के तौर पे कमरा किराये पर ले लिया। उस मकान में मकान मालिक गोपाल शर्मा थे जो कि चालीस वर्षीय थे और सेना में मेजर थे। फिलहाल वो एक महीने के लिये छुट्टी पर आये थे। उनकी बीवी प्रेरणा करीब पैंतीस के ऊपर थीं और स्कूल में टीचर थीं। प्रेरणा भाभी का जिस्म काफी मस्त और सुडौल था। उनकी बड़ी-बड़ी चूचियाँ और गोल-गोल चूतड़ थे। जब वो ऊँची हील के सैंडल पहन कर गाँड मटका कर चलती थी तो उन्हें देख कर किसी का भी लंड अपने आप खड़ा हो जाता था। उनकी कोई औलाद नहीं थी। गोपाल जी और प्रेरणा भाभी दोनों बहुत मिलनसार थे और खुले विचारों वाले थे। मियाँ-बीवी में खूब जमती थी। वो लोग मुझसे घर के सदस्य की तरह ही बर्ताव करते थे, कभी मुझे पराया नहीं समझते थे। जब तक गोपाल जी की छुट्टी रही हम दोनों हर शुक्रवार और शनिवार को जम कर पीते थे और प्रेरणा भाभी भी हमारा साथ देती थी। उस वक्त उनकी अदा काफी सैक्सी और अलग लगती थी।
एक बार गोपाल जी और प्रेरणा भाभी सुबह सो रहे थे। मैंने नहा-धोकर सोचा की काम वाली नौकरानी तो आयी नहीं है और प्रेरणा भाभी भी अभी उठी नहीं है तो चाय कौन पिलायेगा। इसलिये मैं खुद ही रसोई में केवल टॉवल लपेट कर चाय बनाने चला गया। जब चाय बन कर तैयार हो गयी तो देखा प्रेरणा भाभी रसोई में खड़ी-खड़ी मुझे देख रही थी।



वो बोली, “विक्की! मुझे उठा लिया होता तो मैं ही चाय बना देती।”
मैंने कहा, “आप लोगों की नींद खराब ना हो इसलिये मैंने आप को नहीं जगाया और सोचा जब चाय बन जायेगी तो आप लोगों को जगा दुँगा।”
इतने में वो मेरे पास आकर खड़ी हो गयी। तब मैं चाय को छलनी से छान रहा था कि पता नहीं कैसे मेरा टॉवल खुल कर नीचे गिरा और मैं बिल्कुल नंगा हो गया क्योंकि अंदर कुछ भी नहीं पहना था। मुझे नंगा देख कर वो अवाक रह गयी और सिर झुका कर खड़ी हो गयी। मैंने तुरंत चाय का बर्तन नीचे रखा और टॉवल उठा कर लपेट लिया। जब तक मैंने नंगे जिस्म को टॉवल में कैद नहीं किया वो तिरछी नज़र से मेरे मोटे और लंबे लौड़े को घूर रही थी।
मैंने कहा, “सॉरी भाभी!”
वो बोली, “कोई बात नहीं… तुमने जानबूझ कर तो नहीं किया… ये सब अचानक हो गया!”
फिर वो चाय की ट्रे लेकर अपने कमरे में चली गयी। मैं भी तैयार होकर दफ़्तर चला गया। शाम को जब सात बजे घर आया तो साथ में व्हिस्की लेकर आया क्योंकि शुक्रवार था और शनिवार और रविवार को मेरी छुट्टी रहती है।
घर आकर फ्रैश होके करीब पौने-नौ बजे गोपाल जी और मैं पीने बैठे। अभी हमारा एक पैग भी खतम नहीं हुआ था की गोपाल जी ने प्रेरणा भाभी को बुलाया और कहा, “डार्लिंग तुम भी आ जाओ और हमें कंपनी दो।”
प्रेरणा भाभी भी एक ग्लास लेकर आयी और पैग बना कर गोपाल जी के बगल में बैठ कर पीने लगी। मैं और गोपाल जी बरमुडा और टी-शर्ट पहने हुए थे और प्रेरणा भाभी ने पारदर्शी नाइटी पहनी थी जिस में से उनकी काली रंग की ब्रा और पैंटी साफ़ दिख रही थी। दो पैग पीते ही हम तीनों को थोड़ा-थोड़ा नशा होने लगा।
अपना जाम उठा कर पीते हुए गोपाल जी बोले, “यार विक्की! मेरी छुट्टी तो खतम हो रही है, और मंडे की सुबह मुझे आसाम के लिये रवाना होना है। अब मैं छः महीने बाद आऊँगा… तुम घर का और प्रेरणा का खयाल रखना।”
मैंने कहा, “डोंट वरी मेजर साहब! ऑय विल टेक केयर! मैं भी यहाँ करीब छः महीने के लिये ही हूँ!”
वो बोले, “यार अब दो दिन बचे हैं… जम कर मौज करेंगे!”
फिर उन्होंने प्रेरणा भाभी के कंधे पर हाथ रख दिया। हम सब बातों में मशगूल थे की अचानक मेरी नज़र प्रेरणा भाभी पर पड़ी। मैंने देखा कि गोपाल जी जाम पीते-पीते प्रेरणा भाभी की बायीं चूची को दबा रहे थे। ये देख कर मेरा लंड अपनी हर्कत में आ गया लेकिन मैं अंजान बना रहा। फिर भी मेरी नज़र बार-बार प्रेरणा भाभी की चूचियों पर जा रही थी। जब मेरी और प्रेरणा भाभी की नज़र चार हुई तो वो मुझे देख कर मुस्कुराने लगी।


खैर पीने का प्रोग्राम खतम करके हम लोगों ने खाना खाया और अपने कमरों में सोने के लिये चले गये। मुझे नींद नहीं आ रही थी। करीब साढ़े-बारह बजे मैं उठ कर पेशाब करने गया और वापस आते हुए देखा कि गोपाल जी के कमरे की लाईट जल रही थी। मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि खिड़की से झाँक कर देखूँ कि वो क्या कर रहे हैं। मैंने खिड़की से झाँख कर देखा तो वो दोनों बिल्कुल नंगे थे और गोपाल जी प्रेरणा भाभी की चूत चटाई कर रहे थे। प्रेरणा भाभी उनका सिर पकड़ कर उनका चेहरा अपनी चूत में दबा रही थी।
तभी प्रेरणा भाभी बोली, “डार्लिंग मैंने विक्की का लंड देखा है… उसका लंड बहुत मोटा और लंबा है!”


गोपाल जी बोले, “जानू! क्या तुम उसके लंड से चुदवाना चाहती हो?”
वो बोली, “डार्लिंग! क्यों नहीं? जबसे पिछला पेईंग-गेस्ट छोड़ कर अफ्रीका वापस गया है तबसे कोई नया लंड नहीं लिया… विक्की का लंड तो उस नीग्रो से भी ज्यादा मोटा और लंबा है… उसे सिड्यूस करके उसके लंड से ज़रूर चुदवाऊँगी!”
गोपाल जी बोले, “तुम बाज़ नहीं आओगी डार्लिंग! उस नीग्रो लड़के के साथ भी खूब ऐश करी थी तुमने… चलो ऑल द बेस्ट!”
फिर गोपाल जी उठ कर उनकी चूत में लंड डाल कर फचाफच चोदने लगे। उनकी ये बातें सुन कर मैं हैरान हो गया और जब उनकी चुदाई खतम हुई तो मैं अपने कमरे में आकर सो गया लेकिन मेरे दिमाग में बार-बार उनकी बातें और चुदाई का खयाल घूम रहा था।
खैर सुबह करीब दस बजे मैं उठा और नहा धोकर जब नाश्ता करने लगा तो देखा गोपाल जी घर पर नहीं थे। मैंने प्रेरणा भाभी से पूछा, “भाभी! मेजर सहाब कहाँ हैं?”
प्रेरणा भाभी बोली, “अपने दोस्त के घर गये है और दोपहर को करीब एक बजे आयेंगे।”
जब मैं नाश्ता कर रहा था तो देखा प्रेरणा भाभी की नज़र बार-बार मेरे बरमूडे पर जा रही थी। जब हमारी नज़र चार हुई तो मैंने प्रेरणा भाभी से पूछा, “भाभी क्या देख रही हो?”
प्रेरणा भाभी बोली, “विक्की जब से मैंने तुम्हारा देखा है मैं हैरान हूँ… क्योंकि ऐसा मैंने आज तक किसी का ही देखा!”
मैं बोला, “क्या नहीं देखा भाभी?”
वो बोली, “विक्की ज्यादा अंजान मत बनो… कल जब तुम्हारा टॉवल गिरा तो मैंने तुम्हारी कमर के नीचे का हिस्सा नंगा देखा और दोनों टाँगों के बीच जो वो लटक रहा था… उसे देख कर मैं हैरत-अंगेज़ हूँ।”
प्रेरणा भाभी की ये बातें सुन कर मैं उत्तेजित हो गया और हिम्मत कर के अपना लंड बरमूडे से निकाल कर उन्हें दिखाते हुए बोला, “प्रेरणा भाभी… आप इसकी बत कर रही हो?”
वो बोली, “हाँ.. बिल्कुल इसी की बात कर रही हूँ!”
मैं बोला, “कल तो आपने दूर से देखा था… आज करीब से देख लो!” और उनका हाथ पकड़ कर अपना लंड उसके हाथ में दे दिया।
प्रेरणा भाभी मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर बोली, “हाय अल्लाह! कितना मोटा और लंबा है!” और लंड की चमड़ी को पीछे करके सुपाड़े पर एक चुम्मा दे दिया।
फिर मैंने कहा, “प्रेरणा भाभी अब आपकी भी तो दिखा दो!” तो वो मेरे लंड को बरमूडे में डाल कर बोली, “विक्की आज नहीं! मेजर साहब के जाने के बाद दिखा दुँगी।”

फिर हम दोनों उठ कर खड़े हो गये। वो अपने काम में लग गयी और मैं टीवी देखने लगा। रविवार रात तक हम तीनों ने खूब जाम कर शराब पी और सोमवार की सुबह गोपाल जी टैक्सी लेकर रेलवे स्टेशन चले गये। मैं उठा तो सुबह के करीब सात बज रहे थे। प्रेरणा भाभी भी स्कूल जाने के लिये तैयार हो चुकी थी। मैंने प्रेरणा भाभी से कहा, “भाभी! अब तो मेजर सहाब चले गये… अब तो आपकी दिखा दो!”
प्रेरणा भाभी ने अदा से मुस्कुराते हुए तुरंत अपनी सलवार नीचे खिसका कर अपनी चूत दिखा दी। उनकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, लगता है की हेयर रिमूवर से नियमित अपनी चूत साफ करती थी। मैं उनकी चूत पर हाथ रख कर थोड़ी देर सहलाया और फिर उनकी चूत पर चुम्मा लिया।
वो बोली, “अब बस विक्की! रात को और दिखा दुँगी। अभी स्कूल के लिये लेट हो रहा है!” फिर वो स्कूल चली गयी और उसके बाद मैं भी नहाकर दफ़्तर चला गया। दफ़्तर में मेरा मन नहीं लग रहा था और शाम होने का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था।




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